Wednesday, 15 January 2014

भटकता युवावर्ग

                     भटकता युवावर्ग , और सम्भावनाएं



 भारतीय शिक्षा व्यवस्था कि अगर समीक्षा कि जाये ये पता चलता हाई कि इसव्यवस्था मैं ऐसा कुछ भी नही जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग कर सके।  इसलिए १२वी  पास करते ही विध्यार्थी दुविधा में पड़ जाते है कि उन्हें करना क्या है , जिन बच्चो के माँ बाप पड़े लिखे समझदार होते है वो सही समय पर बच्चो को सही सलाह देते है जिससे उन्हें अपने भविष्य के बारे मैं निर्णय लेने कि समझ होती है ,लेकिन जिन बच्चों को माँ बाप से सही मार्गदर्शन न मिला पाये उनका क्या , वो सभी लोग उस भीड़ मैं शामिल होते हैं, जिसे हम भटकता युवा वर्ग कहते है, हालांकि आज तकनीक के विकास के साथ युवाओं को भी कई अवसर मिल रहे हैं  , मोबाइल एक ऐसा ही माध्यम है जिसने आज की सामाजिक व्यवस्था को बदलने का काम किया है, इंटरनेट के मोबाइल पे उपलब्ध होने से युवा ,किसी भी विषय की  जानकारी प्राप्त कर सकता है.






       लेकिन तकनीक का उपलब्ध होना ही केवल काफी नहीं उसका फायदा उठाने के लिए, समय का दुरूपयोग भी तकनीक का एक नकारात्मक प्रभाव है। मोबाइल मैं उपलब्ध अप्प्लिकेशन्स जैसे फेसबुक, whatsapp  युवाओं को अपनी और आकर्षित कर रहा है और इन चीजो मैं वो अपना बहुमूल्य समय नस्ट कर रहे  हैं। राजनीति भी एक ऐसा छेत्र है जो नए युवावर्ग को अपनी और आकर्षित कर रही है।  लेकिन राजनीति में केवल वही लोग सफल हो पाते हैं जिनके पास या तो खोने के लिए कुछ ना हो या जिसे खोने से फर्क न पड़ता हो।  राजनीति में चुनाव लड़ने का अपना एक महत्व है ,और चुनाव  लड़ना आज के दौर मैं बेहद खर्चीला है  , केवल यही नहीं केवल खर्च करना ही ओअर्यप्त नहीं है बल्कि लोगों को खुद से बांधे रखना भी एक चैलेन्ज  है।वर्त्तमान राजनीती मैं कुछ चेहरे उभर के आये है ,जैसे कि अरविन्द केजरीवाल, प्रशांत भूषण, मनीष सिसोदिया इयादि अब इन लोगों की  पारिवारिक स्थिति को अगर देखें तो ज्ञात होता है कि किसी का भी परिवार उनके राजनीतिक भविष्य पर निर्भर नहीं है , केजरीवाल कि पत्नी एक आईएस ऑफिसर है और पूरी तरह परिवार की जवाबदारी उठाने मैं सक्षम है प्रशांत भूसन एक प्रतिस्ठित वकील हैं, कुमार विश्वास , प्रोफेसर हैं।  अर्थात सभी जीवन मैं बहुत कुछ प्राप्त कर चुके हैं।   यदि एक युवा कॉलेज से डिग्री लेकर राजनीति में  प्रवेश करना चाहे तो , पारिवारिक सहयोग के बिना कुछ कर पाना  सम्भव नहीं और  पारिवारिक सहयोग मिलना आर्थिक स्थिति पर भी काफी हद तक निर्भर करता है।
           ऐसी स्थिति में युवा वर्ग का भटकना स्वाभाविक है। अब प्रश्न ये है कि युवा को भटकने से कौन बचा सकता है।  एक  शिक्षित और जागरूक परिवार ही युवा का सही मार्गदर्शन कर सकता है, एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था युवावर्ग कि अच्छे भविष्य कि गारंटी है।  

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