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Sunday, 7 October 2018

समय का बढ़ता दुरूपयोग

    कहने को हम आधुनिक जीवन सैली मैं ढलते जा आहे हैं किन्तु अगर सही तरीके से मूल्यांकन  करें तो यह ज्ञात होगा कि आधुनिकता कि दौड़ में  हम व्यर्थ कि चीजों में  अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।  एक अच्छे सामाजिक स्तर को बनाये रखने के लिए हम एक अच्छे मोबाइल, अच्छे ब्रांड के कपडे ,जूते आदि के पीछे न जाने कितना ही पैसा बर्बाद कर रहे हैं। पुराने लोगों के अनुभव अगर हम जानें तो यह ज्ञात होगा कि सादा जीवन जीने का जो मजा है वो किसी भी चकाचौध भरे जीवन में  नहीं है।  कुछ समय पहले ही मैंने एक समाचार पत्र मैं पड़ा एक वृद्ध दंपत्ति ने १५० करोड़ कि संपत्ति दान करदी और ५० हज़ार रूपये अंतिम  संस्कार के लिए भुगतान कर दिया है  तब ज्ञात हुआ कि , केवल पैसा ही सबकुछ नहीं होता।  जिसके पीछे सारी  उम्र भागते रहे अंत मैं वो निरर्थक ही होता  है।  इंटरनेट ,मूवीज , शौपिंग तो जैसे समय व्यतीत करने का सबसे आसान तरीका हो गया है।  इन सब साधनो से बेशक समय व्यतीत होता हो ,पर सेहत के लिए कुछ खास फायदेमंद नहीं है. इंटरनेर उसे करने के लिए घंटों एक ही अवस्था मैं बैठे रहने से , पीठ दर्द जैसी समस्याए  हो सकती हैं।  साथ  ही मूवीज , इंटरनेट इत्यादि इस दौर कि नयी  पीड़ी को एकाकी बना रही है , लोगों के बीच संवादहीनता बढ़ती जा रही है , बच्चे अपने माँ बाप से , केवल काम की  ही बातें करते है,  जिससे वो सामाजिक व्यवहार नहीं सीख पाते।  यद्यपि हर एक चीज कि अपनी एक उपयोगिता है , किन्तु  ऐसे कार्यों मैं संलिप्त होना ज्यादा अच्छा है जिससे शारीरिक व्यायाम हो सके जैसे खेलना , दौड़ना , मित्रो से मिलने जाना  इत्यादि।Image result for computer work tirednessImage result for runningImage result for get together

             आज के बदलते दौर मैं ,जो व्यक्ति नयी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करता उसे पिछड़ा हुआ समझा जाता है , यह कहना बिलकुल गलत न होगा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में किसी भी चीज कि उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी सम्रध विरासत को भूलते जा रहे हैं । नित नयी तकनीक एक तीव्र डाटा नेटवर्क मानव जीवन को वास्तविकता से काल्पनिकता की ओर अग्रसर कर रहा है। 4G की आसान उपलब्धता ने युवावर्ग को समय गवाने का एक साधन ही मुहैया कराया है. भारत जहाँ दुनिया  के अग्रणी देशों से डाटा की उपलब्धता और तीव्रता से प्रतिस्पर्धा आर रहा है वहीँ  , डाटा की उपलब्धता से कम उम्र मे ही बच्चे ऐसी चीजें सिख रहे है जो उनसे मानसिक रूप से विकृत कर रहा है , जिसका उदाहरण विगत कुछ समय में बढती घटनाओ से समझा जा सकता है। डिजिटल संसार में आय की अपार संभावनाएं तो हैं परन्तु इसके दुष्परिणाम भी कम नहीं हैं ।
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  इसलिए ये समय है सचेत रहते हुए आगे बढने का और आने वाली पीढ़ी को सही मार्गदर्सन देने का।


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