१ जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है, नव वर्ष
विश्व के
अधिकाँश
देशों
में
, नव वर्ष १
जनुअरी
को
मनाया
जाता
है
यद्यपि
भारत
में
अलग
अलग
धर्मो
और
स्थान
के
अनुसार
अलग
अलग
तिथियों
पर
नव
वर्ष
मनाया
जाता
है
,किन्तु
१
जनवरी
को
सभी
लोग
सामान
रूप
से
मनाते
हैं
नव वर्ष का इतिहास
ऐसा अनुमान
है
कि
नव
वर्ष
मनाने
का
प्रारम्भ
,जुलिअस सीजर
द्वारा
ईशा
से
४५
वर्ष
पूर्व
ग्रेगरियन
केलिन्डर
बनाने
से
हुई
, इस केलिन्डर
के
अनुसार
१
जनवरी
वर्ष
का
प्रथम
दिन
था
और
इसे
नव
वर्ष
के
रूप
में
मनाया
जाने
लगा
.
एक अन्य
मान्यता
के
अनुसार
जनवरी
महीने
का
नाम
रोम
के
एक
देवता
“ जानूस “ के
नाम
पर
पड़ा
जिसके
दो
मुह थे एक
सामने
की
तरफ
और
एक
पीछे
की
तरफ
था
, इसलिए
वो
भूतकाल
और
भविष्य
काल
के
बारे
में
सब
जानते
थे
, उनके नाम पर
ही
जनवरी
को
वर्ष
का
प्रथम
माह माना गया
और
१
जनवरी
को
नववर्ष
मनाया
जाने
लगा
.
इसके अलावा
कुछ
लोग
ये
भी
मानते
है
की
जनवरी
माह
से
दिन
का
बड़ा
होना
प्रारम्भ
हो
जाता
है
इसलिए
१
जनवरी
को
नववर्ष
मनाया
जाता
है
.
क्या सभी देशो में नव वर्ष १ जनवरी को मनाया जाता है?
ऐसा बिलकुल भी नहीं है ,भारत में
वर्ष
में
एक
बार
नहीं
बल्कि
कई
बार
नववर्ष
मनाया
जाता
है
,गुजरात में
दीपावली
के
अगले
दिन
, तो पारसी
, पंजाब में बैसाखी
से
नए
वर्ष
की
शुरुआत
होती
है
तो
महारास्ट्र में मार्च
अप्रैल
के
आस
पास
पड़ने
वाले
गुडी
पड़वा
को
नव
वर्ष
मनाया
जाता
है
, तो हिन्दू
धर्म
के
अनुसार
चैत्र
माह
की
प्रतिपदा
से
नव
वर्ष
का
शुभारम्भ
माना
जाता
है
.
भारत ही
नहीं
कुछ
अन्य
देश
भी
हैं
जो
१
जनुवरी
को
नव
वर्ष
नहीं
मनाते
जैसे
की
इसराइल
और पारसिया
में
20 सितम्बर को
तो
ग्रीक
में
20 दिसम्बर को
नव
वर्ष
मनाने
का
रिवाज
है
.
कैसे मनाया जाता है नव वर्ष
३१ दिसम्बर
की
रात
१२
बजते
ही
नए
वर्ष
का
आगमन
हो
जाता
है
और
पूरे
विस्वा
में
आतिशबाजो
शुरू
हो
जाती
है
, लोग नाचते गाते
हैं
और
एक
दुसरे
को
बधाईयाँ
देते
हैं
. लोग नए वर्ष
कुछ
नया
करने,स्वयं
में
कुछ
सुधार
लाने
जैसे
संकल्प
भी
लेते
हैं
, हालांकि कुछ
ही
लोग
ऐसे
संकल्प
को
पूरा
करते
हैं
, फिर भी ये
एक
प्रथा
के
समान
है
.
नए वर्ष
में
एक
दुसरे
से मिलने और
बधाई
देने
का
दौर
कुछ
दिनों
तक
जारी
रहता
है . बहुत से लोग नव वर्ष पर छुट्टियाँ मनाने सैर
पर
निकल
जाते
हैं
, भारत में गोवा
एक
ऐसी
जगह
है
जहां
नव
वर्ष
के
समय
विदेशी
पर्यटकों
की भारी भीड़
दिखाई
देती
है
.
नव वर्ष का आकर्षण
नव वर्ष का मुख्य आकर्षण है , ३१ दिसम्बर १२ बजे होने वाली आतिशबाजी . ऑस्ट्रेलिया, होन्ग-कोंग,दुबई, मास्को ,लन्दन , रिओ दे जिनारियो आदि स्थानों पर अलग ही रौनक रहती है जिसे पूरे विश्व में देखा जाता है.
नव वर्ष का बदलता स्वरुप
समय के
साथ
नव
वर्ष
का
स्वरुप
भी
बदलता
जा
रहा
है.
शोर
शराबे
और
नशे
की
बढती
प्रवर्ती
ने
इस
उत्सव
को
विलासिता
से
भरा
उत्सव
बना
दिया
है
. नयी पीढ़ी द्वारा
ऐसी
प्रवत्ति
को
बड़ी
शीघ्रता
से
अपना
लिया
जाता
है
. नशे की हालत
में
वाहन
चलाने के
कारण
३१
दिसम्बर
की
रात
बहुत
सी
दुर्घटनाएं
भी
होती
हैं.
कई स्थानों पर महिलाओं से छेड़ छाड़ की घटनाएं भी होती हैं .
"नव-वर्ष बीते हुए कल की परेशानियों , कठिनायों को भुलाने और आने वाले कल के सुन्दर भविष्य की कामना के लिए मनाये जाने वाला एक दिन हैं और यही इस दिन को एक ख़ास दिन बनाता है ."


No comments:
Post a Comment