आज पहली बार ब्लॉग लिख रहा हूँ इसलिए , शुभारम्भ एक कविता से करना चाहता हूँ ,
" चाहता हूँ मैं कि एक मुस्कान सबके पास हो ,
हर मुस्किल घड़ी मैं कोई अपना पास हो।
कहाँ किसी को मिल सका जो चाहता वो दिल से है,
राहें जो हों खुशनुमा , मजा कहाँ मंजिल में है। "
इससे आगे कुछ सूझ नहीं रहा मित्रो हो सके आगे कुछ पंक्तियाँ जोड़ो , देखते हैं कितनी लम्बी कविता बनती है। अभी के लिए शुभ रात्रि।
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