मैं दो तीन वर्ष पूर्व , उत्तराखंड राज्य मैं हल्द्वानी से नैनीताल जा रहा था , मैं बस के दाएं तरफ की सीट पर बैठा हुआ था .
उसी बस मैं बाएं तरफ खिड़की के पास एक लड़का और उसके बगल मैं एक वृद्धआदमी बैठा हुआ था। लड़के के कान में इअर फ़ोन लगा हुआ था। लग रहा था मानो वो संगीत सुन रहा हो , कुछ देर पश्चात वो वृद्ध आदमी मेरे पास बैठे व्यक्ति से मोबाइल के बारे में कुछ बात करने लगा , मैंने भी उसकी बातों पर ध्यान लगाया और मोबाइल कि बुराइयां सुनने लगा।
वो व्यक्ति बोल रहा था कि इस मोबाइल ने झूठ बोलना कितना आसान कर दिया है, अगर कोई आदमी आपके पड़ोस मैं भी हो तो वो आपको बतायेगा कि, अभी वो बाहर है मिल नहीं सकता। बात तो सही थी , फिर वो बोला इस मोबाइल ने तो आजकल के बच्चों को भी बिगाड़के रख दिया है , रात दिन बस मोबाइल से चिपके रहते हैं, दुनिया कि कोई सुध ही नहीं है उन्हें। फिर से एक बार मैं इस बात से सहमत था क्योंकि मैंने भी कई लोगों को मोबाइल से घंटों चिपके हुए देखा था । फिर वो बोला लड़कियों को तो मोबाइल देना ही नहीं चाहिए, इस मोबाइल की वजह से ही आजकल कि लड़कियों केघर से भागने के केस बढ़ रहे हैं। इसी दौरान मैं ये सोचने लगा कि ये वृद्ध आदमी इस मोबाइल के बारे में क्यों बात कर रहा है, वो भी एक अनजान आदमी के साथ जो केवल उसकी बस में सफ़र कर रहा है , इस पूरे वार्तालाप के दौरान वो लड़का इन सभी बातों से अनजान अपने मोबाइल के साथ व्यस्त था। नैनीताल अब समीप ही था तभी उस लड़के और वृद्ध आदमी के बीच कुछ बात हुई थोड़ी देर में वृद्ध आदमी कि आवाज तेज होने लगी , और सभी लोगों का ध्यान उसकी तरफ गया , वो आदमी उस लड़के को डांटने लगा कि तुम्हें शर्म नहीं आती इतनी देर से लड़की से बात कर रहा है, कैसी बात कर रहा है , माँ बाप ने इसलिए मोबाइल दिया है, जैसे ही बस रुकी लोगों ने उस वृध्ध आदमी को समझा कर उतार दिया ,मुझे उस लड़के पर भी दया आ रही थी क्योंकि वो समझ ही नहीं पाया कि बिना किसी के बात के उसे डांठ क्यों पड़ गयी, और उस आदमी के बच्चों पर भी तरस आ रहा था शायद उन्हें अब मोबाइल नहीं मिलेगा।
शुभ रात्रि।


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