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Monday, 12 November 2018

इलाहाबाद का नाम क्यूँ किया गया प्रयागराज , प्रयागराज का एतिहासिक महत्त्व

क्या है प्रयाग राज का मतलब और महत्त्व?


प्रयाग भारत के  प्राचीनतम शहरों में से एक है .ऐसी मान्यता है की ब्रह्मदेव ने सृष्टि  की रचना करने के पश्चात पहला यज्ञ यहीं पर किया  था . "प्र" यानी प्रथम और याग का तात्पर्य " यज्ञ"   है.

 प्रयाग भारत की पवित्र नदियों गंगा , यमुना और  सरस्वती (अद्रश्य  रूप में) संगम पर स्थित है जिसे "त्रिवेणी" संगम भी कहते हैं अतः इसे तीर्थों का राजा कहा जाता है , अतः इसका नाम " प्रयागराज " कहा जाने लगा .



यह भी मान्यता है की जंगल जाते वक्त भगवान श्री राम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे. जब श्री राम पहुंचे तो  रामचरितमानस में दिए हुए वृतांत में प्रयागराज का वर्णन हुआ है . मत्स्य पुराण में भी इसका वर्णन है. उसमें लिखा गया है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती है. इसलिए उसका नाम प्रयागराज पड़ा था. 


कैसे पड़ा  प्रयागराज का नाम इलाहाबाद ?

जैसा की सभी जानते है भारत में मुगलों  ने शाशन किया ,जिनमें  से प्रख्यात हैं , बादशाह अकबर , जो हुमायूँ के पुत्र थे . प्रयाग में १५७४ ई. में एक किले का निर्माण प्रारम्भ किया और नए शहर को बसाया . अकबार ने इसका नाम इलाहाबाद रखा , "इलाह " एक अरबी शब्द है जबकि "आबाद " एक फ़ारसी . इलाह अर्थात "ईश्वर द्वारा ", और आबाद यानी "बसाया हुआ ". इस तरह इलाहाबाद शब्द का शाब्दिक अर्थ " ईश्वर द्वारा बसाया हुआ" या "ईश्वर का शहर "है .

    प्रयागराज  का नाम बदलकर इलाहाबाद सन १५८३ में हुआ . जिसे १६ अक्टूबर २०१८ को उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर फिर से प्रयागराज कर दिया .

क्यूँ किया गया इलाहाबाद को फिर से प्रयागराज ?

प्रयाग  हिन्दू तीर्थों में से सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ है और लम्बे समय से हिन्दू संतों की यह मांग थी की प्रयागराज  के एतिहासिक और धार्मिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए इसका नाम इलाहाबाद से पुनः प्रयागराज किया जाए . 



उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने में हिन्दू संतों ने काफी सहयोग किया था इसी कारण योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का वादा किया था और  उन्होंने १६ अक्टूबर को इस वादे को पूरा कर दिया .

प्रयागराज का धार्मिक एवं एतिहासिक महत्त्व 

प्रयागराज  को "तीर्थराज प्रयाग" भी कहा जाता है . यह हिणुओं के लिए अबसे बड़ा तीर्थ है .इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ माधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विध्यमान हैं। जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। यह सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुम्भ  की चार स्थलियों में से एक है. यहाँ प्रत्येक छः वर्ष में "कुम्भ" और बारह वर्षों में "महाकुभ "का मेला लगता है .

यहाँ आकर गंगा स्नान करने से मनुष्य अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है ऐसा हिन्दुओं की मान्यता है अतः प्रयागराज का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व है .






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