उपवास करने वाले क्या खाएं और कैसे खोले अपना उपवास
नवरात्री के दिनों में माँ दुर्गा की अराधना के साथ बहुत से लोग पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं , केवल एक वक़्त रात्रि का भोजन ही करते हैं।उपवास रखने का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं है बल्कि अपनी बुरी आदतों का भी त्याग करना है इसलिए उपवास के दौरान-
- दिन में केवल जलपान किया जाता है ।
- जो लोग पूरे दिन खाली पेट नहीं रह पाते वो लोग , फल , दूध और दही का सेवन कर सकते हैं ।
- अधिकाँश लोग दिन में चाय का सेवन करते हैं , चाय भूख को कम करती है इसलिए उपवास करना आसान हो जाता है ।
- रात्रि भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- लहसुन और प्याज का सेवन नवरात्री के दिनों में वर्जित है अतः इसे घर के भोजन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए , लहसुन ओर प्याज को तामसी प्रवर्ती का माना गया है ।
- नवरात्री दौरान मदिरापान और किसी भी प्रकार के अन्य नशे का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- उपवास करने वाले व्यक्ति को अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए , गेहूं के आटे के स्थान पर कुट्टू ,या सिंगाड़े के आटे का इस्तेमाल रोटी या पूरी बनाने के लिए करना चाहिए ।
- नवरात्री में साबूदाने की खिचड़ी, और खीर खायी जाती है ।खीर बनाने के लिए मखाने का भी इस्तेमाल किया जा सकता है ।
- विष्णु पुराण के अनुसार नवरात्रि व्रत के समय दिन में नहीं सोना चाहिए ।
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए ओर देवी का पूजन करना चाहिए ।
- नौ दिन में २४ हजार गायत्री मन्त्रों का जाप करना चाहिए , जाप करने के लिए तुलसी ,चन्दन या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना चाहिए ।
क्या होता है कन्या पूजन और इसका महत्त्व
- नौ दिनों तक उपवास करने के बाद उपवास खोलने से पूर्व कन्या पूजन किया जाता है ।
- वैसे तो हर दिन एक कन्या को भोजन करना चाहिए । किन्तु अष्टमी और नवमी को नौ बालिकाओं को भोजन कराया जात है ।
- नौ बालिकाओं को जिनकी आयु १0 वर्ष से कम हो ,और एक बालक को को घर पर बुलाकर उन्हें एक स्थान पर कृम से बैठाया जाता है ।
- बालक को हनुमान जी का रूप माना जाता है ।जैसे माँ की पूजा भैरव की पूजा के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती, वैसे ही कन्या पूजन बालक के बिना अधूरी मानी जाती है ।
- सभी बच्चों को शुध्ध आसन लगाकर बैठाया जाता है और उनके पैर धोये जाते है जिसे अपने शीश पर लगते है ।
- तत्पश्चात माथे पर चन्दन और कुमकुम लगाते हैं , और पुष्प चढाते हैं और उन सभी की आरती की जाती है ।
- आरती के पश्चात सभी को घर में बनाये गये प्रसाद और व्यंजनों का भोग लगाया जाता है ।
- भोजन उपरांत सभी को दक्षिणा भी दी जाती है ।
- कन्या पूजन पूर्ण होने के बाद ही अपना उपवास छोड़ना चाहिए ।
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