Thursday, 20 December 2018

क्यूँ मनाया जाता है क्रिसमस, और क्या है इसका इतिहास आइये जानें


क्रिसमस का इतिहास एवं महत्त्व


जैसा की सभी जानते हैं कि क्रिसमस ,इसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे प्रत्येक वर्ष २५ दिसम्बर के दिन मनाया जाता है . इस त्यौहार को पूरे विश्व में मनाया जाता है.


क्यूँ मनाया जाता है क्रिसमस?


क्रिसमस का त्यौहार प्रभु येशु के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है यद्यपि प्रभु येशु के जन्मदिन के सन्दर्भ में बाइबिल या किसी अन्य पुस्तक कोई निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं है , एन्नो डोमिनि काल प्रणाली के अनुसार यीशु (ईशा मसीह ) का जन्म 7 से २ ई. पू. के बीच हुआ था . ईशा मसीह अपने जन्म के ३० वर्षो तक एक स्थान से दुसरे स्थान पर भटकते रहे और इस दौरान उन्होंने कई चमत्कार दिखाए जिसके कारण लोग उन्हें इश्वर का अवतार मानने लगे किन्तु मसीह स्वयं को ईश्वर का  पुत्र कहते थे न की ईश्वर.

क्या है  दुख का कारण? 

 ईशा मसीह का जन्म


इसाईयों की ये मान्यता है की “ईशा मसीह” या “मसीहा” मरियम के पुत्र के रूप में पैदा हुए .गोस्पेल ऑफ़ लुके के अनुसार येशु (मसीह ) , मरियम और सेंट जोसफ के पुत्र थे और उनका जन्म बेतलहम के एक अस्तबल में हुआ था.

क्रिसमस का इतिहास


२५ दिसम्बर को येशु के जन्मदिन मनाने का सबसे पहला सन्दर्भ ३५४ में रोम में संकलित एक पांडुलिपि में पाया जाता है , क्रिसमसव पर्व को कुछ देशों में २५ दिसम्बर से अगले १२ दिनों तक मनाया जाता है .
आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च ६ जनवरी को क्रिसमस मनाता है क्यूंकि वो ग्रेगोरियन केलिन्डर को मानते है ,जो की जूलियन केलिन्डर से १३ दिन पीछे चलता है इसलिए २५ दिसम्बर से १३ वें दिन यानी कि ६ जनवरी को क्रिसमस मनाते हैं.
सन १८७० से ब्रिटेन में क्रिसमस पर राजकीय अवकाश की घोषणा हुई और आज पूरे विश्व में क्रिसमस के दिन छुट्टी मनाई जाती है .

सांता क्लोज का इतिहास


सांता क्लाज ,नाम टर्कि में जन्मे निकोलस के नाम पर दिया गया जो एक सीनियर पादरी थे .सांता क्लाज की लोकप्रिय छवि जर्मन मूल के अमेरिकी कार्टूनिस्ट थॉमस नस्ट ने बनायी गयी जो हर वर्ष एक नयी छवि बनाते थे , 1863 में इसकी शुरुवात हुई और 1920 के दशक में विज्ञापनदाताओं के द्वारा इसे मानवीकृत किया गया .
लोग अपने बच्चों को सांता की कहानी सुनाते हैं कि सांता अच्छे  बच्चों को उपहार देते हैं और संता के भेष बनाकर बच्चों में उपहार और खिलोने बाटते हैं .प्रत्येक वर्ष बच्चे सांता का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं .


क्रिसमस का पेड़ और सजावट


क्रिसमस के पेड़ की पूजा को बुतपरस्त इसाई मान्यता की तरह देखा जाता है , क्रिसमस का पेड़ एक कटीला पेड़ होता है जिसे जगमगाती लाइटों और सितारों से सजाया जाता है . क्रिसमस वृक्ष को सजाने की परंपरा का प्रारम्भ १९१२ में हुआ जब एक बीमार बच्चे जोनाथन ने अपने पिता से अनुरोध किया कि उसे एक सुन्दर सा क्रिसमस का पेड़ लाकर दे और पिता ने अपने पुत्र को खुश करने के लिए क्रिसमस के पेड़ को काफी सजाया .  


 क्रिसमस और भारत


भारत में क्रिसमस अंग्रोजो के द्वारा लाया गया और उन्होंने इसे बड़ा दिन कहा , क्यूंकि 20 से 25 दिसम्बर के बीच सबसे छोटा दिन होता है और इसके बाद दिन बड़े होते हैं .भारत में क्रिसमस का त्यौहार बड़े शहरों में काफी जोर शोर से मनाया जाता है और सभी धर्मों के लोग इसमें शामिल भी होते हैं . भारत की यही विशेषता है कि यहाँ सभी धर्म के त्योहारों को लोग मिलकर मनाते हैं .
क्रिसमस और नव वर्ष के समय गोवा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है और अनेक  देशों से पर्यटक यहाँ छुट्टियाँ मनाने आते हैं .इस समय गोवा में बहुत चहल पहल रहती है , जिसकी रौनक देखते ही बनती है .







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