प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में , कभी न कभी सरकारी कार्यालय से पला जरूर ही पड़ता है, चाहे वो जन्म प्रमाद पत्र बनाने हेतु हो, स्थाई निवास प्रमाण पत्र बने हेतु हो , मेडिकल सर्टिफिकेट हो या कोई अन्य कार्य हो।सरकारी काम पड़ते ही ये सोच स्वाभाविक ही आ जाती है, कि कार्य मैं अधिक समय लगेगा , और आज के भाग दौड़ भरे जीवन मैं समय की तो सबको कमी है। अब प्रश्न यह उठता है कि जिस कार्य के लिए समय कि आवश्यकता हो उसे करने मैं समय कैसे बचाया जाय। यही प्रश्न कई गलत मार्ग खोल देता है। मान लिया जाय कि मेरी प्रति घंटा आय १०० रूपये है और मुझे सरकारी ऑफिस मैं काम करवाने मैं चार घंटे लगते हैं, तो मेरे ४०० रूपये का नुक्सान हुआ , और यदि कोई व्यक्ति १०० रूपये लेकर एक घंटे मेरा काम करवा दे तो मैं निश्चित ही उसे ये राशि देने को सहमत हो जाऊँगा। हालांकि मैं जानता हूँ कि ये गलत है , पर मेरे स्वार्थ के लिए मैं ये गलत कार्य करने को तैयार हो जाता हूँ। और इसी से भ्रस्टाचार को बढ़ावा मिलता है। अब प्रश्न ये उठता है कि इससे बचा कैसे जाए। किसी भी सरकारी काम करवाने में सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि , सही तरीके का ज्ञान नहीं होता। कौन सा काम किस कर्मचारी का है यदि ये ज्ञात हो तो आप हर कार्य शीघ्रता से करवा सकते हैं। यदि हर एक कर्मचारी कि टेबल पर उसके कार्यछेत्र का विवरण दिया हो तो, वो उस कार्य से मुकर नहीं सकता। अब एक एक ऑनलाइन डेटाबेस कि कल्पना जिसमे एक कर्मचारी जिससे आप अपने कार्य के लिए मिले उसका विवरण दर्ज हो तो , कर्मचारी कि जवाबदारी निर्धारण करना कितना आसान हो जाएगा।
हालांकि हर एक सिस्टम मैं कोई न कोई कमी जरूर होती है , जिसका फायदा लोग उठाते हैं मनमानी करने में, किन्तु ये कहना कदाचित उचित होगा , ऐसा करने मैं हम सभी भागीदार होते हैं। यदि कोई कर्मचारी आपका काम करने के लिए आपसे पैसे मांगता है तो आपको उसकी शिकायत करनी चाहिए ताकि वो अगली बार ऐसा करने कि हिमात न करे , लेकिन आज के समय कोई किसी का बुआ नहीं बनना चाहता। इसी से ऐसे लोगों को हिमात मिलती है , ऐसी ही एक घटना मेरे साथ भी हुई। अपने ऑफिस के सामन कि चोरी कि प्राथमिकी दर्ज करने के पश्चात मुझसे पुलिस वाले ने मुझसे चाय पानी देने को कहा मैंने उससे पूछा किस बात का चाय पानी, उसने बोला प्राथमिकी लिकने का चार्ज , मैंने उससे कहा सरकार इसी बात कि तनख्वाह देती हिअ , और चाय पानी कि बात एस० पी ० साहब से पूछ लेता हूँ , जिनका नम्बर दीवार पे लिखा हुआ था। मेर ई बात सुनकर वो पुलिस वाला चुप हो गया और बात टालने लगा। जागरूक लोगो का काम हर सरकारी कर्मचारी को करना ही पड़ता है। हर एक नागरिक एक ऐसा सरकारी तंत्र चाहता है जो हर काम उचित समय पर और ईमादारी से करइ पर उसके लिए पूरी व्यवस्था परिवर्तन कि आवश्यकता है। हर एक कार्य कि जावबदेही आखिर मैं निचले कर्मचारी पैर थोप दी जाती है जिस कारण वो व्यक्ति काम में कम और जावबदेही से बचने में ज्यादा ध्यान देता है।
यदि व्यवस्था परिवर्तन के बारे मिअन कोई सुझाव हो तो अवश्य ही उस पर चर्चा होनी चाहिए , यदि कोई सुझाव हो तो अवश्य शेयर करें।
शुभ रात्रि।
हालांकि हर एक सिस्टम मैं कोई न कोई कमी जरूर होती है , जिसका फायदा लोग उठाते हैं मनमानी करने में, किन्तु ये कहना कदाचित उचित होगा , ऐसा करने मैं हम सभी भागीदार होते हैं। यदि कोई कर्मचारी आपका काम करने के लिए आपसे पैसे मांगता है तो आपको उसकी शिकायत करनी चाहिए ताकि वो अगली बार ऐसा करने कि हिमात न करे , लेकिन आज के समय कोई किसी का बुआ नहीं बनना चाहता। इसी से ऐसे लोगों को हिमात मिलती है , ऐसी ही एक घटना मेरे साथ भी हुई। अपने ऑफिस के सामन कि चोरी कि प्राथमिकी दर्ज करने के पश्चात मुझसे पुलिस वाले ने मुझसे चाय पानी देने को कहा मैंने उससे पूछा किस बात का चाय पानी, उसने बोला प्राथमिकी लिकने का चार्ज , मैंने उससे कहा सरकार इसी बात कि तनख्वाह देती हिअ , और चाय पानी कि बात एस० पी ० साहब से पूछ लेता हूँ , जिनका नम्बर दीवार पे लिखा हुआ था। मेर ई बात सुनकर वो पुलिस वाला चुप हो गया और बात टालने लगा। जागरूक लोगो का काम हर सरकारी कर्मचारी को करना ही पड़ता है। हर एक नागरिक एक ऐसा सरकारी तंत्र चाहता है जो हर काम उचित समय पर और ईमादारी से करइ पर उसके लिए पूरी व्यवस्था परिवर्तन कि आवश्यकता है। हर एक कार्य कि जावबदेही आखिर मैं निचले कर्मचारी पैर थोप दी जाती है जिस कारण वो व्यक्ति काम में कम और जावबदेही से बचने में ज्यादा ध्यान देता है।
यदि व्यवस्था परिवर्तन के बारे मिअन कोई सुझाव हो तो अवश्य ही उस पर चर्चा होनी चाहिए , यदि कोई सुझाव हो तो अवश्य शेयर करें।
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