परम विदुषी गार्गी
ईसा से
लगभग
७००-८००
वर्ष पूर्व
गर्ग
वंश
के
ऋषि
वचक्नु
थे
जो
वेदों
के
जज्ञाता
थे
ओर
वेदों
का
पठन पाठन
किया
करते
थे
, वचक्नु की
पुत्री
का
नाम
वाचकन्वी
था
,गर्ग वंश में
पैदा
होने
के
कारण
उन्हें
गार्गी
भी
कहा
जाता
है
. गार्गी की
रूचि
बाल्यावस्था
से
वैदिक
साहिया
में
अत्यधिक
रुचि
थी
अतः
वो
अपने
पिता
से
वेदों
का
ज्ञान
लेने
लगी
. ऋषि वचक्नु
के
आश्रम
में
नियमितशास्त्रथ
किया
जाता
था
जिसमें
गार्गी
भी
भाग
लिया
करती
थी
.
महर्षि दधिची की कथा
महर्षि दधिची की कथा
ऋषि याज्ञवलक्य के साथ शास्त्रार्थ
वृहदारण्यक उपनिषद में एक अत्यंत ही रोचक शास्त्रार्थ का वर्णन है ,
ऋषि याज्ञवलक्य और गार्गी के मध्य .राजा जनक जो की एक दानी राजा थे उन्होंने एक
बार सोने से १००० गायों का निर्माण कराया और सभी ब्राह्मणों को आमंत्रण भेजा . सभी
ब्राह्मणों के बीच राजा ने ये घोषणा कि आप में से जो भी सबसे अधिक ज्ञानी है वो ही
ये गायें ले जा सकता है . कुछ देर तक वहाँ शांति छाई रही , क्यूंकि ये निर्णय कैसे
हो की सबसे अधिक ज्ञानी कौन है .तभी ऋषि याज्ञवलक्य
ने अपने शिष्यों से कहा की इन गायों को अपने आश्रम ले चलो . इस सभा गार्गी भी
मौजूद थी , उन्हें ये सब समझ नहीं आया. तभी सभी ऋषि याज्ञवलक्य से शास्त्रथ करने
लगे किन्तु याज्ञवलक्य बड़ी ही आसानी से सभी को उतार देने लगे तब गार्गी उठ कड़ी हुई
और उन्होंने याज्ञवलक्य से शास्त्रथ करने की अनुमति मांगी जिसे सभी ब्राह्मणों से
सहमती दे दी . तत्पश्चात गार्गी ने ऋषि याज्ञवलक्य से प्रश्न पूछना प्रारम्भ किया
, गार्गी ने पुछा कि, ये समस्त पार्थिव पदार्थ जिस प्रकार जल मे
ओतप्रोत हैं, उस प्रकार जल किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- जल वायु में ओतप्रोत है।
गार्गी- वायु किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- वायु आकाश में ओतप्रोत है।
गार्गी- अन्तरिक्ष किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- अन्तरिक्ष गन्धर्वलोक में
ओतप्रोत है।
गार्गी- गन्धर्वलोक किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- गन्धर्वलोक आदित्यलोक में
ओतप्रोत है।
गार्गी- आदित्यलोक किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- आदित्यलोक चन्द्रलोक में
ओतप्रोत है।
गार्गी- चन्द्रलोक किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- नक्षत्रलोक में ओतप्रोत है।
गार्गी- नक्षत्रलोक किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- देवलोक में ओतप्रोत है।
गार्गी- देवलोक किसमें ओतप्रोत है?
याज्ञवल्क्य- प्रजापतिलोक में ओतप्रोत है।
गार्गी- प्रजापतिलोक किसमें ओतप्रोत है?
इतने सारे प्रश्न सुनकर ऋषि याज्ञवलक्य कई बार क्रोधित भी हो
जाते किन्तु गार्गी बड़ी ही विनम्रता से अगला प्रश्न ऋषि के सामने प्रस्तुत कर देती
. गार्गी के सभी प्रश्नों का ऋषि याज्ञवलक्य ने जवाब दे दिया अंत गार्गी
संतुष्ट होगर बोली इण गायों को ले जाने की योग्यता आप ही रखते है गुरुवर .जिस
प्रकार श्री कृष्ण और अर्जुन के मध्य वार्तालाप से गीता का निर्माण हुआ , उसी
प्रकार विदुषी गार्गी और ऋषि याज्ञवलक्य के मध्य हुए शास्त्रथ से ही
ववृहदारण्यक उपनिषद का निर्माण हुआ .यह उपनिषद वेदों का हिस्सा है .
विदुषी गार्गी का योगदान
एक
पुरुष प्रधान समाज में समय समय पर स्त्रियों ने अपनी अलग पहचान बनायी . विदुषी
गार्गी ऐसी ही कुछ महिलाओं में शामिल है, जिन्होंने रूढिवादी मान्यताओं को गलत
साबित किया और पुरुषों के सामन स्त्रियों की योग्यता और क्षमता का प्रदर्शन किया .विदुषी
गार्गी ने ज भी प्रश्न ऋषि याज्ञवलक्य से किये उन सभी प्रश्नों के
उत्तर गार्गी स्वयं भी जानती थी, किन्तु उन्हें इस बात का ज़रा भी अहंकार नहीं था .
विदुषी
गार्गी ने विवाह नहीं किया और आजीवन ब्रह्मचारिणी रही .
