धार्मिक सहिष्णुता और भारत
दुनिया में
कई सारे धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं.हर देश में किसी एक धर्मं को मानने
वालों की तादात दुसरे धर्म को मानने वालों से अधिक ही होती है और वहाँ लिए जाने
वाले अधिकाँश निर्णय किसी धर्म से प्रभावित होते है . जहां तक भारत का प्रश्न है ,
भारत सदैव हो एक सहिष्णु देश रहा है जहां पर सभी धर्मों को समान आदर दिया गया है
चाहे वो धर्म किसी आक्रमणकारी के द्वारा ही क्यूँ न लाया गया हो .
भारतीय संस्कृति
की पृष्ठभूमि हजारों वर्ष पुरानी है . भारतीय वेदों ने भी कहा है “ वसुधैव
कुटुम्बकम” अर्थात पूरी धरती एक परिवार है और पृथ्वी के निवासी इस परिवार के सदस्य
. केवल यही नहीं “ अतिथि देवो भवः “ और “सर्वे भवन्तु सुखिनः ,सर्वे सन्तु निरामया
“ जैसे ही कितने सुन्दर विचार भारतीय संस्कृति को सबसे भिन्न और विशिष्ट बनाते
हैं.
भारतीय संस्कृति की सहिष्णुता के प्रमाण
भारतीय
संस्कृति की सहिष्णुता के कई साए उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं . भारत पर समय समय पर
विदेशी आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया सबसे पहले तुर्क और फिर मुग़लों ने भारत पर
आक्रमण किया. इस आक्रमण के साथ ही इस्लाम धर्म भारत आया .मुगलों ने अंग्रेजों के
आने तक भारत पर राज किया , मुगलों के समय इस्लाम धर्म काफी तेजी से फैला ,और
भारतीय संस्कृति के अनुरूप ढल गया .
इसका
बात एक प्रमाण इतिहास में दर्ज है.चित्तोड़ के राजपूत शासक राणा सांगा की पत्नी रानी कर्णावती थी .
राणा सांगा की मृत्यु के बाद रानी कर्णावती ने चित्तोड़ का शासन संभाला . तभी
गुजरात के सुलतान बहादुर शाह ने चित्तोड पर हमला कर दिया , रानी कर्णावती ने उस
समय अपना एक दूत , एक चिट्ठी और राखी के साथ हुमायूं के पास भेजा, हुमायूं को अपना भाई मानकर उससे
मदद मांगी .हुमायूं उस समय पूर्वी बंगाल जीतने गया हुआ था , रानी का पत्र मिलते ही
हुमायूं ने अपनी यात्रा बीच में ही रोक दी और , चित्तोड़ की ओर प्रस्थान प्रारम्भ
कर दिया , किन्तु हुमायूं के पहुचने से पूर्व ही राजपूत बुरी तरह से युद्ध हार गये
और रानी कर्णावती ने अन्य राजपूत नारियों के साथ अग्नि में कूदकर जौहर कर दिया .
भारतीय
संस्कृति की महानता की ना जाने कितनी कथाएँ हैं, विश्व के सभी धर्मो को भारत ने
आश्रय दिया है . जब यहूदी और पारसियों का कत्लेआम किया जा रहा था तब भारत ने ही
इन्हें शरण दी . पारसी धर्म की अनुमानित कुल आबादी वर्ष 2004 मात्र 124000 से 190000 के आस पास थी जिनमे से आधे से अधिक पारसी भारत में थे .यहूदी धर्म के
मानने वाले भी ईजराइल अलावा केवल भारत में ही हैं और भारतीय नागरिक हैं . इससे अधिक क्या प्रमाण
हो सकता है भारत की श्रेष्ठ विरासत का .
यह भारतीय
संस्कृति का बड़प्पन ही है कि हिन्दू धर्म के मानने वालों की बाहुल्यता होने के बाद
भी सभी धर्म को मानने वालों को अपनी इच्छानुसार धर्म पालन , विवाह और पारिवारिक
मसलों को सुलझाने के अधिकार दिए गये हैं.
भारत एक
मजबूत लोकतंत्र है जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं चाहे वो किसी भी
धर्म या सम्प्रदाय् को मानने वाला हो.
यह भारतीय
संस्कृति की महानता ही है जो 800 सालों को गुलामी के बाद भी अपने अस्तित्व को
संजोये रखा है . विविधता में एकता ही भारत की पहचान है ,


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