नवरात्री में अष्टमी का क्या महत्व है ?
नवरात्री प्रारंभ होने के बाद आठवे दिन को अष्टमी , दुर्गाष्टमी या महा अष्टमी कहा जाता है ।दुर्गा पूजा के दस दिनों में सबसे पवित्र दिन अष्टमी को माना जाता है ।जो लोग पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख पाते वो लोग अष्टमी के दिन उपवास रखते हैं ।इस दिन माँ दुर्गा के हथियारों की पूजा की जाती है , और इसे "वीर अष्टमी" भी कहा जाता है ।
दुर्गाष्टमी का इतिहास और महत्त्व
माँ दुर्गा से जुडी कई सारी कहानियाँ प्रचलित है जिसमे से सबसे अधिक प्रशिद्ध और प्रचलित कहानी है राक्षस महिषासुर की ।महिषासुर ने भगवान ब्रह्मा की अराधना में घोर तपस्या की और भगवान् ब्रह्मा को प्रशन्न किया। महिषासुर ने वरदान ये अस्शिर्वाद माँगा की कोई कोई भी पुरुष उसका वध न कर पाए और भगवान् ने उसे ये वरदान दे दिया ।
ब्रह्म्देवता के वरदान मिलने के बाद महिषासुर ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया , सभी देवता महिषासुर के सामने बेबस हो गये और ब्रह्मा , विष्णु और शिव तीनो देवताओं के पास अपनी दुविधा लेकर पहुचे । तब तीनों ने मिलकर एक समाधान निकाला ।तीनो ने अपनी शक्ति को एकत्रित किया जिससे आदिशक्ति का जन्म हुआ । आदिशक्ति माँ दुर्गा ने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को महिसासुर का संहार किया इसीलिए माँ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनिं भी कहा जाता है ।अतः दुर्गा अष्टमी का उपवास कर माँ दुर्गा को प्रसन्न किया जाती जो सभी दुखों क नाश करती है ।
ब्रह्म्देवता के वरदान मिलने के बाद महिषासुर ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया , सभी देवता महिषासुर के सामने बेबस हो गये और ब्रह्मा , विष्णु और शिव तीनो देवताओं के पास अपनी दुविधा लेकर पहुचे । तब तीनों ने मिलकर एक समाधान निकाला ।तीनो ने अपनी शक्ति को एकत्रित किया जिससे आदिशक्ति का जन्म हुआ । आदिशक्ति माँ दुर्गा ने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को महिसासुर का संहार किया इसीलिए माँ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनिं भी कहा जाता है ।अतः दुर्गा अष्टमी का उपवास कर माँ दुर्गा को प्रसन्न किया जाती जो सभी दुखों क नाश करती है ।
पूजा विधि
अष्टमी के दिन प्रातःकाल में स्नान करने के पश्चात पूजन के लाल फूल ,चन्दन ,दिया ,धूप इत्यादि का प्रयोग किया जाता है और नेवैद्य चडाया जाता है । गाय के दूध ,दही , घी, शहद और चीनी के मिश्रण से पंचामृत तैयार किया जाता है । यह पंचामृत पवित्र माना जाता है और घर के सभी सदस्यों को पिलाया जात है । दुर्गा चालिषा के पाठ द्वारा माँ दुर्गा की पूजा की जाती है । कुछ लोग नवरात्री का उपवास अष्टमी के दिन ही खखोल देते हैं इसलिए इसी दिन नौ कन्याओं को भोजन कराकर अपना उपवास पूरा करते हैं ।
दुर्गा पूजा
भारत के पूर्वी हिस्सों में अष्टमी के दिन दुर्गा पूजा बड़े ही धूम धाम से मनाये जाती है , विशेषकर बंगाल में दुर्गा पूजा का अलग ही महत्व है । कई दिन पहले ही दुर्गा माँ की भव्य प्रतिमा का निर्माण किया जाता है ।जगह जगह पंडाल लगाये जाते हैं जहां दुर्गा माँ की प्रतिमा की स्थापना की जाती है । दुर्गा पूजा में मुख्य रूप से नारियां ही शामिल होती है ,सभी औरते एक दुसरे को गुलाल लगाती हैं



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